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Insta Publishing | Book Details

Category : Poetry

Rs. 325

SKU : BOOK20IP0093

Pages : 198

Available Now: Yes

  • Book Name: Dil Se
  • Author Name: Sarita Prasad
  • ISBN Code: 978-93-88660-64-8
  • Publish Date: 2021-03-22

प्रस्तुत काव्य-संग्रह “दिल से” में सरिता जी (लेखिका) ने मानव जीवन के इन्हीं अनुभवों और भावों को शब्दों में व्यक्त करने की एक अद्भुत और सफल कोशिश करी है। सरिता जी की रचनाओं में एक ओर जहां स्त्री-पुरुष के प्रेम का अमूर्त स्वरूप देखने को मिलता है तो वहीं लेखिका ने अपने अनुभवों के आधार पर पुरुष-मात्र के स्वभाव और प्रवृति, नारी-सुलभ प्रकृति, बाल-सुलभ उच्छृंखलता और राजनीतिक यथार्थ को भी समझने का प्रयास किया है। एक स्त्री होने के कारण लेखिका द्वारा स्त्री-सुलभ व्यवहारों और बाल-सुलभ उच्छृखलताओं का चित्रण स्वाभाविक है लेकिन अपनी रचनाओं में लेखिका ने पुरुष-सुलभ जटिल व्यवहारों और मानसिकता का जो स्वाभाविक चित्रण किया है वह सचमुच तारीफ के काबिल है। साथ ही इस काव्य-संग्रह का सबसे सबल पक्ष है कि लेखिका ने इसके संग्रह में तकरीबन समाज के हर वर्ग, बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, नारी और पुरुष, प्रेम और सुख-दुख, स्त्री और पुरुष सबों का ध्यान रखा है। साथ ही लेखिका द्वारा लिखित प्रेम कहानी, “एक चुटकी सिंदूर” का पुस्तक में संयोजन ‘सोने-पे-सुहागा’ जैसा है। लेखिका के वास्तविक अनुभवों पर आधारित होने और सरल शब्दों के उचित प्रयोग के कारण रचना काफी रोचक और पठनीय बन पड़ी है। कहना न होगा कि लेखिका ने प्रस्तुत पुस्तक को सचमुच “दिल-से” लिखने की कोशिश की है।

सरिता प्रसाद - मूलतः बिहार राज्य की निवासी हैं। शिक्षा-शास्त्र में स्नातक (बी.एड) की डिग्री लेने के बाद से संप्रति स्वतंत्र लेखन का कार्य। मूल रूप से कवियित्रि श्रीमती सरिता प्रसाद की उपन्यास और कहानी लेखन के साथ-साथ हिन्दी कविताओं में विशेष रुचि रही है। कई सारी प्रकाशित और अप्रकाशित कविताओं का लेखन। इनकी कई रचनाएँ, जैसे, “अपना राग”, “लोकतंत्र और जातिवाद”, “लोकतन्त्र और हमारी भूमिका” और “तीन-तलाक” इत्यादि, हैदराबाद से प्रकाशित होने वाले “दैनिक हिन्दी मिलाप” में प्रकाशित हो चुकी हैं तो इनके द्वारा लिखित “मर्द का दर्द” और “आज भी वो मंजर याद आता है”, “प्यासी ये धरती फिर से लहलहाई” आदि “रचनाकार” और “एक चुटकी सिंदूर”, “प्रतिलिपि” में प्रकाशित हो चुकी है। इनके द्वारा लिखित और प्रकाशित उपन्यास “सफर के हमसफर” काफी लोकप्रिय रही है। प्रस्तुत कविता-संग्रह, “दिल-से” की रचयिता “सरिता प्रसाद” एक तेजी से उभरती युवा कवियित्रि और उपन्यासकार हैं। अपनी रचनाओं में कवियित्रि ने एक ओर तो नारी सुलभ भावनाओं और संवेदनाओं की सूक्ष्म विवेचना करने का सार्थक प्रयास किया है तो दूसरी ओर भारतीय पौराणिक चरित्रों को सकारात्मक स्वरूप में समझने का प्रयास भी किया है। प्रस्तुत काव्य-संग्रह में लेखिका ने अपने अनुभवों के आधार पर पुरुष-मात्र के स्वभाव और प्रवृति, नारी-सुलभ प्रकृति, बाल-सुलभ उच्छृंखलता और राजनीतिक यथार्थ को भी समझने का प्रयास किया है। लेखिका की विशेषता स्त्री-सुलभ व्यवहारों और बाल-सुलभ उच्छृखलताओं का स्वाभाविक चित्रण और अपनी रचनाओं में पुरुष के जटिल व्यवहारों यथार्थ विवेचन करना है। मनुष्य के जीवन में ऊँचे विचारों और पारिवारिक मूल्यों के महत्वों का हिमायत करते इनकी रचनाओं में व्यावहारिक आदर्शवाद की स्पष्ट झलक इनकी रचनाओं को पठनीय और रोचक बनाती है।

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