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Insta Publishing | Book Details

Category : Fiction

Rs. 119

SKU : BOOK20IP0091

Pages : 60

Available Now: Yes

  • Book Name: Parakh
  • Author Name: Arun Prabha Pant
  • ISBN Code: 978-93-90468-93-5
  • Publish Date: 2021-03-22

मैंने अपने आंचल में जो फूल और शूल पाये उनके रस में रसी पड़ी मेरी यह तीन रचनाएं हमारे यथार्थ की अभिव्यक्ति हैं। जीवन में सही की परख ,जीवन संग्राम में साहस का दमखम और दुर्गम परिस्थितियों में भी आगे बढ़ना तथा घुप्प अंधेरे में उजाले की प्रतीक्षा ही नहीं उसके स्वागत की रुपरेखा तैयार कर झंझावातों से लड़ने के अदम्य साहस को दिखाती मेरी दो लघुकथाएं तथा एक दीर्घ कथा अभावों में ,दुर्दिनों में जीने वालोें को निःसंदेह प्रेरित करेंगी। इस कार्य की निरंतरता को अबाधित रूप देने के लिए मैं अपने परिवार अपने बच्चों की आभारी हूं।अब पाठकों की निष्पक्ष प्रतिक्रिया मुझे संबल प्रदान करेगी शुभम् अरुण प्रभा पंत अंनत शुभकामनाओं के साथ मां प्रकृति के गोद से १५,१०,२०२०

मैं अरुण प्रभा पंतM.A.BEd 07,01,1953में लखनऊ में पैदा पली बड़ी आबादी हुई और जहां मैंने निरंतर लगभग ४२वर्ष तक शिक्षण कार्य किया और अब सेवानिवृत्त हो पुत्र के साथ रह रही हूं। मेरा जन्म एक मध्यम वर्गीय परिवार में लखनऊ में हुआ, जहां हम अपनी मातृभाषा कुमाऊनी में बोलते थे। अपने जीवन के संघर्षों से मैंने जीवन की राह समझी,पढ़ना पढ़ाना लिखना मेरी दैनंदिनी का अटूट हिस्सा रहा है। अब तक मैं अपने को आल्हादित रखने के लिए लिखती थी पर अपने शुभचिंतकों की परामर्श से अब मैंने अपनी लेखनी के उत्पादों को प्रकाशित करने का मन बनाया और अब तक मेरी दो पुस्तकें हिंदी में लघु कथाओं की प्रकाशित हो चुकी हैं एक नाटक जो कुमाऊनी में कलमबद्ध किया गया है प्रकाशित होने वाला है। मैं लेख निबंध व्यंग भी लिखती आती हूं।अब तक मैंने लगभग सौ से ऊपर कविताएं हिंदी और कुमाऊनी में लिखी हैं। लेखन मेरे अंतर्मन की पुकार है जो मेरी मानसिक भूख को शांत करता है लिखते समय एक स्वतंत्र विचरण करने वाली वनदेवी सा अनुभव करती हूं जहां मां प्रकृति और मेरे पात्र मुझे संगत देते हैं। मैं जिस परिवेश की कथा लिखती हूं उसका अध्ययन करके सारी तैयारी के साथ अपने पात्रों के उद्गार लेखनी से ढालती हूं,मेरा कल्पना लोक वास्तविकता के धरातल पर टिका है। सबको शुभाशीष के साथ अरुण प्रभा पंत १५,१०,२०२०

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